(All Shayari Collection)

ज़माने से नहीं, तन्हाई से डरते हैं,
प्यार से नहीं, रुसवाई से डरते हैं,
मिलने की उमंग है दिल में लेकिन,
मिलने के बाद तेरी जुदाई से डरते हैं


बिन बात के ही रूठने की आदत है;
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है;
आप खुश रहें, मेरा क्या है;
मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है।


घर से बाहर कोलेज जाने के लिए वो नकाब मे निकली,
सारी गली उनके पीछे निकली,
इनकार करते थे वो हमारी मोहबत से,
और हमारी ही तसवीर उनकी किताब से निकली


उसे भूल कर जिया तो क्या जिया ,
दम है तो उसे पाकर दिखा ,
लिख पथरों पर अपनी प्रेम कहानी ,
और सागर को बोल ,
दम है तो इसे मिटाकर दिखा.


जहाँ याद न आये तेरी वो तन्हाई किस काम की;
बिगड़े रिश्ते न बने तो खुदाई किस काम की;
बेशक़ अपनी मंज़िल तक जाना है हमें;
लेकिन जहाँ से अपने न दिखें, वो ऊंचाई किस काम की।


उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो;
जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो;
इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है;
इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो..


भीड़ की आदत नहीं मुझे,
थोड़े में जीना सीख लिया है मैंने,
चन्द दोस्त हैं, चन्द दुआएं हैं,
बस इन खुशियों को गले लगा लिया मैंने ।


रात गुमसूँ है मगर चेन खामोश नही,
कैसे कह दू आज फिर होश नही,
ऐसा डूबा तेरी आखो की गहराई मैं,
हाथ में जाम है मगर पीने का होश नही


किसी ने मुझ से कहा बहुत खुबसूरत लिखते हो यार,मैंने कहा … खुबसूरत मैं नहीं वो है जिसके लिए हम लिखा करते है


कोई वादा ना कर, कोई ईरादा ना कर,
ख्वाइशों मे खुद को आधा ना कर,
ये देगी उतना ही जितना लिख दिया खुदा ने,
इस तकदीर से उम्मीद ज़्यादा ना कर… !!